खरमास एक विश्लेषण:- बाबा-भागलपुर

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भागलपुर, बिहार: जब सूर्य धनु राशि में आते हैं तो खरमास लग जाते हैं। पंचांग के अनुसार खरमास 15 दिसंबर 2020 से शुरू हो रहा है। इस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन हो रहा है, सूर्य वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि परिवर्तन को धनु संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद सूर्य मकर राशि में आते हैं, जिसे मकर संक्रांति कहते हैं।

इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पं. आर. के. चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- पंचांग के अनुसार जब सूर्य 12 राशियों का भ्रमण करते हुए बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो अगले एक माह तक खरमास लग जाता है।

इस अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसलिए खरमास के दौरान विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके साथ ही इस दौरान भवन निर्माण, नया व्यापार, नई वस्तुओं/ चीजों की खरीदारी नहीं की जाती है।

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव की गति खरमास के दौरान धीमी पड़ने लगती है तथा खरमास को सौर मास भी कहा जाता है। इस मास में धार्मिक यात्रा करने को श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। खरमास के दौरान पवित्र नदी में नित्य स्नान करने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। इस मास में पड़ने वाली एकादशी पर व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।

खरमास में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। खरमास में पीपल पूजन करना चाहिए। जिन लोगों को किसी प्रकार की बाधा का सामना करना पड़ रहा है उन्हें खरमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करा कर उपहार प्रदान करना चाहिए।

खरमास में हर प्रकार की व्यसनों से बचना चाहिए। इस दौरान मन को शांत, संयम और धैर्य सहित व्यतीत करना चाहिए।

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